XRISM मिशन की बड़ी खोज: Gamma Cassiopeiae के X-ray रहस्य के पीछे मिला छिपा White Dwarf साथी
खगोल विज्ञान की बड़ी जीत: XRISM ने सुलझाया
Gamma Cassiopeiae का 50 साल पुराना रहस्य
अंतरिक्ष हमेशा से ही रहस्यों का पिटारा रहा है। लेकिन कुछ रहस्य ऐसे होते हैं जो दशकों तक वैज्ञानिकों की नींद उड़ाए रखते हैं। इन्ही में से एक था Gamma Cassiopeiae (γ Cas) तारे का रहस्य। पिछले 50 वर्षों से खगोलशास्त्री इस बात को लेकर उलझन में थे कि यह तारा इतनी असामान्य और शक्तिशाली एक्स-रे (X-rays) क्यों उत्सर्जित कर रहा है?
हाल ही में, जापान की अंतरिक्ष एजेंसी (JAXA) और नासा (NASA) के संयुक्त मिशन XRISM (X-ray Imaging and Spectroscopy Mission) ने इस पहेली को सुलझा लिया है। इस खोज ने न केवल एक पुराने विवाद को खत्म किया है, बल्कि ब्रह्मांडीय पिंडों के बीच होने वाली जटिल अंतःक्रियाओं को समझने का एक नया नजरिया भी दिया है।
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Gamma Cassiopeiae: एक अजीबोगरीब तारा
कैसियोपिया (Cassiopeia) तारामंडल में स्थित 'Gamma Cassiopeiae' रात के आकाश में दिखाई देने वाला एक चमकीला तारा है। यह एक 'Be type' तारा है—यानी एक ऐसा विशाल और गर्म नीला तारा जो अपनी धुरी पर इतनी तेजी से घूमता है कि उसके चारों ओर गैस और मलबे की एक डिस्क बन जाती है।
1970 के दशक में जब पहली बार एक्स-रे दूरबीनों ने इसे देखा, तो वैज्ञानिक हैरान रह गए। आमतौर पर इस तरह के तारों से निकलने वाली एक्स-रे बहुत कमजोर होती हैं, लेकिन Gamma Cassiopeiae से निकलने वाली किरणें उम्मीद से कहीं ज्यादा गर्म और तीव्र थीं।
50 साल से चल रही बहस: दो मुख्य सिद्धांत
दशकों तक वैज्ञानिकों के बीच दो गुट बन गए थे:
- मैग्नेटिक मॉडल: कुछ का मानना था कि तारे की सतह और उसकी गैस डिस्क के बीच होने वाली चुंबकीय हलचल इन एक्स-रे का कारण है।
- बाइनरी मॉडल: दूसरे गुट का तर्क था कि इस तारे के पास कोई "अदृश्य साथी" (Companion Star) है, जो इसकी गैस को अपनी ओर खींच रहा है और इस प्रक्रिया में एक्स-रे पैदा हो रही हैं।
XRISM टेलीस्कोप: कैसे सुलझी गुत्थी?
जापान का XRISM मिशन विशेष रूप से ब्रह्मांड के सबसे गर्म हिस्सों और उच्च-ऊर्जा वाली किरणों के अध्ययन के लिए बनाया गया है। इसमें लगा 'Resolve' उपकरण प्रकाश को उसके रंगों (Spectra) में विभाजित करने की अद्भुत क्षमता रखता है, जिससे गैस के तापमान और गति का सटीक पता लगाया जा सकता है।
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"सफेद बौने" (White Dwarf) की पुष्टि
XRISM के डेटा ने पुष्टि की है कि Gamma Cassiopeiae अकेला नहीं है। इसके पास एक सफेद बौना (White Dwarf) तारा चक्कर काट रहा है। सफेद बौना एक मरे हुए तारे का अवशेष होता है जो बहुत छोटा लेकिन बेहद घना होता है।
प्रक्रिया क्या है?
Gamma Cassiopeiae अपनी तेज गति के कारण जो गैस की डिस्क बाहर फेंकता है, वह सफेद बौने के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में फंस जाती है। जब यह गैस सफेद बौने की सतह पर गिरती है, तो वह अत्यधिक गर्म हो जाती है। यह प्रक्रिया इतनी ऊर्जा पैदा करती है कि वहां से शक्तिशाली 'हार्ड एक्स-रे' (Hard X-rays) निकलने लगती हैं।
SpaceAlert Fact: सफेद बौने का गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि वह मुख्य तारे से निकलने वाली गैस को "चुरा" लेता है, जिससे वह गैस लाखों डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाती है।
इस खोज का महत्व क्या है?
यह खोज केवल एक तारे के बारे में नहीं है, बल्कि इसके कई बड़े मायने हैं:
- तारकीय विकास (Stellar Evolution): यह हमें यह समझने में मदद करता है कि बाइनरी स्टार सिस्टम (दो तारों वाले तंत्र) कैसे विकसित होते हैं और एक तारा दूसरे के जीवन को कैसे प्रभावित करता है।
- ब्रह्मांडीय प्रयोगशाला: Gamma Cassiopeiae अब वैज्ञानिकों के लिए एक प्रयोगशाला की तरह है, जहाँ वे अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण और उच्च-तापमान वाली भौतिकी का अध्ययन कर सकते हैं।
- XRISM की शक्ति: यह सफलता साबित करती है कि आने वाले समय में XRISM ब्लैक होल और गैलेक्सी क्लस्टर्स के बारे में और भी चौंकाने वाले खुलासे करेगा।


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