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​नासा का पेंडोरा मिशन: क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं? तारों की भाषा समझने वाला नया 'जासूस'

एक आधुनिक अंतरिक्ष टेलिस्कोप (पेंडोरा) जो गहरे ब्रह्मांड में एक चमकते हुए सुनहरे तारे के सामने स्थित है। टेलिस्कोप से नीले रंग की प्रकाश किरणें निकल रही हैं जो तारे की सतह का विश्लेषण कर रही हैं, जैसे कि वह तारे से बात कर रहा हो।"

 

नासा का पेंडोरा मिशन: क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं? तारों की भाषा समझने वाला नया 'जासूस'

​ब्रह्मांड रहस्यों से भरा है। पिछले कुछ दशकों में हमने हजारों एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल के बाहर के ग्रह) खोजे हैं। इनमें से कुछ पृथ्वी की तरह दिखते हैं, कुछ बृहस्पति की तरह विशाल हैं, तो कुछ पूरी तरह से बर्फ या लावा से बने हैं। लेकिन एक सवाल हमेशा बना रहता है: क्या वहां जीवन संभव है?

​इस सवाल का जवाब खोजने के लिए, नासा ने 11 जनवरी 2026 को एक छोटा लेकिन बेहद शक्तिशाली मिशन लॉन्च किया है, जिसका नाम है— पेंडोरा स्पेस टेलिस्कोप (Pandora Space Telescope)

​पेंडोरा क्या है? (The Mission Overview)

​पेंडोरा नासा के 'एस्ट्रोफिजिक्स पायनियर्स' (Astrophysics Pioneers) प्रोग्राम का हिस्सा है। यह एक 'स्मॉलसैट' (SmallSat) मिशन है, जिसका अर्थ है कि यह जेम्स वेब या हबल जैसे विशाल टेलिस्कोप की तुलना में बहुत छोटा और सस्ता है, लेकिन इसका लक्ष्य बहुत विशिष्ट और महत्वपूर्ण है।

​इसका मुख्य काम 20 प्रकाश-वर्ष से लेकर 100 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित 20 तारों और उनके चक्कर लगाने वाले 39 ग्रहों का अध्ययन करना है।

​"तारों की भाषा" समझना क्यों जरूरी है?

​अक्सर जब हम किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की खोज करते हैं, तो हम उस ग्रह के वातावरण (Atmosphere) की जांच करते हैं। अगर वहां ऑक्सीजन, मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड मिलती है, तो हमें लगता है कि वहां जीवन हो सकता है।

​लेकिन यहाँ एक बड़ी समस्या है: तारा (The Host Star)

​ग्रह जिस तारे की परिक्रमा करते हैं, वह तारा खुद भी बहुत अशांत होता है। तारों की सतह पर होने वाले विस्फोट (Solar Flares) और 'सनस्पॉट्स' (Sunspots) ऐसी रोशनी पैदा करते हैं जो ग्रह के वातावरण से आने वाले संकेतों को धुंधला कर देती है। कई बार वैज्ञानिकों को लगता है कि उन्होंने किसी ग्रह पर पानी या गैस खोज ली है, लेकिन असल में वह केवल उस तारे की "शरारत" या शोर (Noise) होता है।

यहीं पेंडोरा की एंट्री होती है। पेंडोरा का काम यह समझना है कि तारा कब और कैसे "बोल" रहा है, ताकि हम ग्रह की वास्तविक आवाज़ (Signals) को साफ-साफ सुन सकें।

​पेंडोरा की अद्भुत तकनीक (The Tech Behind Pandora)


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​पेंडोरा टेलिस्कोप दो अलग-अलग तरंग दैर्ध्य (Wavelengths) में काम करता है:

  1. दृश्य प्रकाश (Visible Light): यह तारों के धब्बों (Starspots) की पहचान करता है।
  2. इन्फ्रारेड प्रकाश (Infrared Light): यह ग्रहों के वायुमंडल में मौजूद गैसों का पता लगाता है।

​पेंडोरा एक साथ इन दोनों डेटा को मिलाकर यह स्पष्ट करता है कि कौन सा संकेत तारे का है और कौन सा ग्रह का। इसे 'स्टेलर कंटैमिनेशन' (Stellar Contamination) को दूर करने की तकनीक कहा जाता है।

​पेंडोरा और जेम्स वेब (JWST): एक बेहतरीन टीम

​जेम्स वेब टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope) ब्रह्मांड की सबसे गहरी तस्वीरें ले रहा है, लेकिन उसके पास हर तारे को घंटों तक निहारने का समय नहीं है।

​पेंडोरा, जेम्स वेब के लिए एक 'बैकस्टेज हेल्पर' की तरह काम करेगा। पेंडोरा लंबे समय तक एक ही तारे पर नजर रखेगा और उसका पूरा "प्रोफाइल" तैयार करेगा। जब जेम्स वेब उस ग्रह को देखेगा, तो उसके पास पहले से ही पेंडोरा का डेटा होगा, जिससे वह सटीक रूप से बता पाएगा कि ग्रह पर जीवन के संकेत हैं या नहीं।

​यह मिशन महत्वपूर्ण क्यों है?

​1. रहने योग्य ग्रहों की पहचान

​हम ऐसे ग्रहों की तलाश में हैं जो 'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' (Goldilocks Zone) में हों—यानी न बहुत गर्म, न बहुत ठंडे। पेंडोरा हमें यह बताने में मदद करेगा कि क्या इन ग्रहों का वातावरण स्थिर है या उनके तारे की गर्मी ने सब कुछ नष्ट कर दिया है।

​2. कम लागत, बड़ी सफलता

​पेंडोरा जैसे स्मॉलसैट मिशन यह साबित करते हैं कि विज्ञान के लिए हमेशा अरबों डॉलर की जरूरत नहीं होती। कम बजट में भी सटीक और केंद्रित (Focused) मिशन ब्रह्मांड के बड़े रहस्यों को सुलझा सकते हैं।

​3. भविष्य के मिशनों की नींव

​पेंडोरा से मिलने वाला डेटा भविष्य के बड़े मिशनों, जैसे 'हैबिटेबल वर्ल्ड्स ऑब्जर्वेटरी' (HWO) के लिए रास्ता साफ करेगा।

​निष्कर्ष: क्या हम अकेले हैं?

​शायद पेंडोरा खुद एलियंस की खोज न करे, लेकिन यह उस "दरवाजे की चाबी" जरूर है जो हमें वहां तक ले जाएगी। ब्रह्मांड की विशालता में हम अकेले हैं या नहीं, यह जानने के लिए हमें पहले अपने पड़ोसी तारों की भाषा को समझना होगा। और पेंडोरा वही अनुवादक (Translator) है।

​जब आप अगली बार रात में आसमान के तारों को देखें, तो याद रखिएगा कि एक छोटा सा भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और नासा के विशेषज्ञों द्वारा बनाया गया टेलिस्कोप वहां ऊपर बैठकर उन तारों की कहानियाँ सुन रहा है।

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