🌌 अंधेरा आकाश खतरे में: चिली के 'खगोल विज्ञान स्वर्ग' पर औद्योगिक परियोजना का खतरा, 30% आकाशगंगाएं ओझल होने की आशंका!
🌌 अंधेरा आकाश खतरे में: चिली के 'खगोल विज्ञान स्वर्ग' पर औद्योगिक परियोजना का खतरा, 30% आकाशगंगाएं ओझल होने की आशंका!
नमस्ते ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने वाले और पर्यावरण के प्रति जागरूक पाठकों!
पृथ्वी पर कुछ ही जगहें ऐसी हैं जो खगोलविदों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं—और उनमें से एक है उत्तरी चिली का अटाकामा रेगिस्तान (Atacama Desert)। यहाँ का सूखा, ऊँचा और प्रदूषण-मुक्त वातावरण इसे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोपों (Telescopes) का घर बनाता है।
लेकिन अब, इस बहुमूल्य "अंधेरे आकाश" (Dark Sky) पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। चिली में एक प्रस्तावित विशाल औद्योगिक परियोजना के कारण, देश के 28 प्रमुख खगोलविदों और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय ने चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि इस परियोजना से होने वाला प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) इतना बढ़ जाएगा कि यहाँ से लगभग 30% धुंधली आकाशगंगाओं को देखने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।
आइए, समझते हैं कि यह परियोजना क्या है, इससे आकाश क्यों काला पड़ रहा है, और खगोलविद इसे स्थानांतरित करने का आग्रह क्यों कर रहे हैं।
🏜️ चिली: खगोल विज्ञान की वैश्विक राजधानी
चिली, विशेष रूप से अटाकामा क्षेत्र, दुनिया के 70% से अधिक खगोल विज्ञान अवलोकनों का केंद्र है। यहाँ की विशेषताएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं:
- सूखापन: अटाकामा दुनिया के सबसे सूखे स्थानों में से एक है, जिसका अर्थ है बहुत कम बादल और नमी।
- ऊँचाई: यहाँ के टेलीस्कोप ऊँचे पहाड़ों पर स्थित हैं, जहाँ वायुमंडलीय विक्षोभ (Atmospheric Turbulence) कम होता है।
- सबसे गहरा अंधेरा: यह क्षेत्र कृत्रिम प्रकाश प्रदूषण से लगभग मुक्त है, जो धुंधली आकाशगंगाओं (Faint Galaxies) और सुदूर पिंडों (Distant Objects) को देखने के लिए आवश्यक है।
यहीं पर यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) के कई बड़े टेलीस्कोप स्थित हैं, और भविष्य की विशाल परियोजनाएँ भी यहाँ स्थापित हो रही हैं।
🏭 प्रकाश प्रदूषण का खतरा: औद्योगिक परियोजना
जिस औद्योगिक परियोजना पर विवाद हो रहा है, वह एक बड़ी खनन या ऊर्जा संयंत्र परियोजना हो सकती है, जिसमें रात के समय बड़े पैमाने पर कृत्रिम प्रकाश का उपयोग शामिल होगा।
- विस्तार: यह परियोजना अवलोकन स्थलों के बहुत करीब स्थित है।
- दुष्प्रभाव: इस संयंत्र से निकलने वाली रात की रोशनी (Night Lighting) आकाश में फैलेगी और 'स्काई ग्लो' नामक घटना उत्पन्न करेगी। यह स्काई ग्लो, रात के आकाश की प्राकृतिक पृष्ठभूमि को उज्जवल बना देगा।
- 30% का नुकसान: खगोलविदों का तर्क है कि सबसे धुंधली आकाशगंगाएँ, जिनका अध्ययन डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के शुरुआती गठन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, इस बढ़ी हुई चमक के कारण अदृश्य हो जाएंगी। एक तिहाई से अधिक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा हमेशा के लिए खो जाएगा।
📣 खगोलविदों का आग्रह: 'स्थानांतरण ही एकमात्र उपाय'
चिली के 28 खगोलविदों के एक समूह ने एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने सरकार और परियोजना डेवलपर्स से सख्त आग्रह किया है:
- परियोजना को स्थानांतरित करना: उनका कहना है कि परियोजना को ऐसे स्थान पर ले जाया जाना चाहिए जहाँ से यह अवलोकन स्थलों पर न्यूनतम प्रभाव डाले।
- कानून का सख्त पालन: खगोलविदों ने चिली के 'डार्क स्काई कानून' को सख्ती से लागू करने की मांग की है। यह कानून विशेष रूप से खगोल विज्ञान अवलोकन स्थलों की रक्षा के लिए प्रकाश उत्सर्जन को नियंत्रित करता है।
- वैज्ञानिक नुकसान: उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि इससे पूरे विश्व के खगोल विज्ञान अनुसंधान को अपूरणीय क्षति होगी।
🔮 आगे की राह और वैश्विक जिम्मेदारी
यह घटना खगोल विज्ञान बनाम औद्योगिक विकास के बीच बढ़ते वैश्विक संघर्ष का एक और उदाहरण है।
- आर्थिक बनाम वैज्ञानिक मूल्य: चिली सरकार को अब एक कठिन निर्णय लेना होगा: क्या वह तत्काल आर्थिक लाभ के लिए एक परियोजना को मंजूरी दे, या एक ऐसे वैश्विक वैज्ञानिक संसाधन (सबसे अंधेरा आकाश) की रक्षा करे जो दुनिया के लिए अद्वितीय है?
- स्थायी समाधान: भविष्य में, परियोजनाओं को शुरू करने से पहले पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) में प्रकाश प्रदूषण को एक गंभीर कारक के रूप में शामिल करना अनिवार्य होगा।
अटाकामा का अंधेरा आकाश एक प्राकृतिक विरासत है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। विश्व समुदाय की निगाहें अब चिली सरकार पर टिकी हैं कि वह विज्ञान और प्रकृति की रक्षा के लिए क्या कदम उठाती है।
आपकी राय में, इस तरह के वैज्ञानिक खजाने की रक्षा के लिए औद्योगिक विकास को कहाँ तक सीमित किया जाना चाहिए?

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