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100 मिलियन साल बाद जागा विशालकाय ब्लैक होल: J1007+3540 बना “ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी

100 मिलियन वर्षों बाद पुनर्जीवित हुआ सुपरमैसिव ब्लैक होल, जिससे विशाल प्लाज्मा जेट्स निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं
यह चित्र दूरस्थ आकाशगंगा J1007+3540 के केंद्र में स्थित उस सुपरमैसिव ब्लैक होल को दर्शाता है, जो लगभग 10 करोड़ वर्षों की शांत अवस्था के बाद फिर से सक्रिय हो गया है। इसके ध्रुवों से निकलती शक्तिशाली प्लाज्मा जेट्स इसे एक “ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी” जैसा रूप देती हैं।
Image Credit: NASA / ESA / Radio Astronomy Data (Illustration)

 

लेखक: SpaceAlert टीम

हम अंतरिक्ष, खगोल विज्ञान और नई अंतरिक्ष तकनीकों पर आधारित विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत करते हैं।


🔥 पुनर्जीवित “ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी”: 100 मिलियन वर्षों बाद जागा एक विशालकाय ब्लैक होल

ब्रह्मांड रहस्यों से भरा है, और हाल ही में खगोलविदों ने एक ऐसी घटना दर्ज की है जिसने पूरी खगोल-विज्ञान (Astrophysics) कम्युनिटी को चौंका दिया है। एक दूरस्थ आकाशगंगा J1007+3540 के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल अचानक फिर से सक्रिय हो गया है।

हैरानी की बात यह है कि यह ब्लैक होल पिछले 100 मिलियन (10 करोड़) वर्षों से लगभग निष्क्रिय अवस्था में था। इसके पुनः सक्रिय होते ही इससे निकलने वाली अत्यंत शक्तिशाली प्लाज्मा जेट्स ने इसे वैज्ञानिकों के बीच एक नया नाम दिला दिया —

👉 “ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी” (Cosmic Volcano)


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🌌 1. J1007+3540: आकाशगंगा और उसके केंद्र का दानव

आकाशगंगा J1007+3540 पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इसके केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य से अरबों गुना अधिक आँका गया है।

आमतौर पर ब्लैक होल तभी सक्रिय रहते हैं जब उनके पास निगलने के लिए गैस, धूल या तारे उपलब्ध हों। जब यह “ईंधन” समाप्त हो जाता है, तो वे लंबे समय तक शांत अवस्था में चले जाते हैं।

J1007+3540 के साथ भी यही हुआ था — यह ब्लैक होल करोड़ों वर्षों तक “सोया” रहा।


🌋 2. 100 मिलियन वर्षों बाद यह “कॉस्मिक ज्वालामुखी” कैसे जागा?

वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं:

🔹 (i) गैसीय बादलों का आगमन

विशाल गैस और धूल के बादल जब ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के करीब पहुँचते हैं, तो वे तीव्र गति से उसमें गिरने लगते हैं। यही प्रक्रिया ब्लैक होल को दोबारा सक्रिय कर देती है।

🔹 (ii) आकाशगंगाओं का विलय (Galaxy Merger)

संभव है कि J1007+3540 ने हाल ही में किसी छोटी आकाशगंगा को निगलना शुरू किया हो, जिससे ब्लैक होल को अचानक भारी मात्रा में पदार्थ मिला।


3. प्लाज्मा जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली किरणें

ब्लैक होल के सक्रिय होते ही उसके ध्रुवों से दो विपरीत दिशाओं में प्लाज्मा जेट्स निकले:

विस्तार: लाखों प्रकाश वर्ष तक फैली हुई

गति: प्रकाश की गति के करीब

संरचना: आयनित गैस + शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र

इन्हीं रेडियो तरंगों के कारण वैज्ञानिक रेडियो टेलिस्कोप से इस घटना को पहचान पाए।


ब्लैक होल से निकलती उच्च ऊर्जा प्लाज्मा जेट्स और चुंबकीय क्षेत्र का वैज्ञानिक चित्रण
इस चित्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास बनने वाली उच्च-ऊर्जा प्लाज्मा जेट्स और शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों को दिखाया गया है। रेडियो और एक्स-रे अवलोकनों से वैज्ञानिक यह समझने में सफल हुए कि कैसे शांत ब्लैक होल दोबारा सक्रिय होकर आकाशगंगा के विकास को प्रभावित करता है।
Image Credit: NASA / Chandra X-ray Observatory / Conceptual Image


🔬 4. वैज्ञानिक दृष्टि से यह खोज क्यों अहम है?

ब्लैक होल का जीवन-चक्र

यह खोज साबित करती है कि शांत दिखने वाले ब्लैक होल भी दोबारा “जाग” सकते हैं।

आकाशगंगाओं पर प्रभाव

प्लाज्मा जेट्स ठंडी गैस को बाहर धकेल देते हैं, जिससे नए तारों का निर्माण रुक सकता है — इसे AGN Feedback कहा जाता है।

ब्रह्मांडीय समय की समझ

100 मिलियन वर्ष मानव इतिहास में विशाल समय है, लेकिन ब्रह्मांड के लिए यह एक क्षण मात्र है।



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🛰️ 5. यह खोज कैसे की गई? (Technology Behind the Discovery)

रेडियो इंटरफेरोमेट्री: वैश्विक रेडियो टेलिस्कोप नेटवर्क

X-Ray Observations:

Chandra X-ray Observatory ने अत्यधिक ऊर्जावान क्षेत्रों को रिकॉर्ड किया


🔭 6. भविष्य का शोध और नई उम्मीदें

अब वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह “कॉस्मिक ज्वालामुखी” कितने समय तक सक्रिय रहेगा।

NASA और

ISRO

आने वाले वर्षों में ब्लैक होल फीडिंग पर केंद्रित नए मिशन लाने की तैयारी कर रहे हैं।

इसके अलावा James Webb Space Telescope से मिलने वाला डेटा इस रहस्य को और गहराई से समझने में मदद करेगा।


🧠 निष्कर्ष

J1007+3540 का पुनर्जीवित होना यह साबित करता है कि ब्रह्मांड कभी स्थिर नहीं रहता।

एक शांत ब्लैक होल का अचानक से “ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी” बन जाना हमें याद दिलाता है कि अंतरिक्ष के पास हमें चौंकाने के लिए हमेशा कुछ नया होता है।

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यह लेख अंतरराष्ट्रीय खगोल-विज्ञान शोधों, रेडियो और एक्स-रे अवलोकनों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा पर आधारित है। इसमें प्रयुक्त जानकारी NASA, ISRO और वैश्विक खगोल वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा जारी अध्ययनों से प्रेरित है।

चित्र प्रतीकात्मक (Illustrative) हैं और केवल शैक्षणिक व सूचना उद्देश्य से उपयोग किए गए हैं।


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