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मंगल ग्रह पर AI का राज: नासा का पर्सिवियरेंस रोवर अब खुद चल रहा है ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार से

NASA Perseverance Rover using AI AutoNav technology on Mars surface
Image Credit: AI-generated image inspired by NASA visuals

 

लेखक: SpaceAlert टीम
हम अंतरिक्ष, खगोल विज्ञान और नई अंतरिक्ष तकनीकों पर आधारित विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत करते हैं।

यह जानकारी नासा द्वारा जारी आधिकारिक मिशन अपडेट और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है।

मंगल ग्रह पर AI का राज: नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने भरी 'सुपरफास्ट' रफ्तार!

​क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी से करोड़ों मील दूर, एक सुनसान और पथरीले ग्रह पर कोई रोबोट खुद अपना रास्ता चुन सकता है? विज्ञान कथा (Science Fiction) जैसा लगने वाला यह विचार अब हकीकत बन चुका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) में एक नई और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रणाली को सक्रिय कर दिया है।

​इस अपडेट के बाद, पर्सिवियरेंस अब मंगल की खतरनाक चट्टानों और गड्ढों के बीच बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के खुद अपना रास्ता तय कर रहा है। आइए जानते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और मंगल मिशन के लिए यह कितनी बड़ी क्रांति है।


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1. क्या है यह नई AI तकनीक (AutoNav)?

​मंगल ग्रह और पृथ्वी के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि रेडियो सिग्नल को एक तरफ से दूसरी तरफ पहुँचने में कई मिनट लगते हैं। ऐसे में पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिक रोवर को 'जॉयस्टिक' से नहीं चला सकते। पहले रोवर को चलाने के लिए वैज्ञानिकों को पहले उसकी फोटो देखनी पड़ती थी, फिर रास्ता मैप करना पड़ता था और फिर कमांड भेजनी पड़ती थी।

​लेकिन अब, नई AutoNav (Autonomous Navigation) प्रणाली की मदद से पर्सिवियरेंस के पास अपना 'दिमाग' है। यह रोवर:

  • ​अपने कैमरों से 3D मैप बनाता है।
  • ​रास्ते में आने वाली बाधाओं (बड़ी चट्टानें या रेत के जाल) को पहचानता है।
  • ​सबसे सुरक्षित और छोटा रास्ता खुद चुनता है।

2. पहले से कितनी बढ़ गई है रफ्तार?

​पहले के रोवर्स (जैसे क्यूरियोसिटी) बहुत धीमी गति से चलते थे क्योंकि उन्हें हर कदम पर पृथ्वी से अनुमति चाहिए होती थी। लेकिन इस नई AI तकनीक के साथ:

  • तेज़ गति: पर्सिवियरेंस अब पहले के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक तेज़ी से दूरी तय कर रहा है।
  • रिकॉर्ड ब्रेकिंग ड्राइविंग: हाल ही में इसने मंगल के 'जेज़ेरो क्रेटर' (Jezero Crater) के कठिन इलाकों में एक ही दिन में सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया है।
  • समय की बचत: अब वैज्ञानिक ड्राइविंग के निर्देश देने के बजाय, रोवर द्वारा भेजे गए डेटा का विश्लेषण करने पर अधिक समय बिता सकते हैं।

3. मंगल पर AI की जरूरत क्यों पड़ी?

​मंगल ग्रह की सतह बहुत ही अनिश्चित है। वहां नुकीली चट्टानें, गहरी खाई और महीन मिट्टी के ऐसे ढेर हैं जिनमें रोवर के पहिए फंस सकते हैं।

  1. सुरक्षा: AI सिस्टम खतरे को इंसानों से बेहतर और तेजी से भांप सकता है।
  2. सीमित मिशन समय: मंगल मिशन पर समय बहुत कीमती है। रोवर जितनी जल्दी अपने गंतव्य (Destination) पर पहुँचेगा, उतना ही अधिक वैज्ञानिक प्रयोग कर पाएगा।
  3. नमूनों को इकट्ठा करना: पर्सिवियरेंस का मुख्य काम मंगल से मिट्टी के नमूने (Samples) इकट्ठा करना है। AI उसे जल्दी से उन जगहों पर पहुँचा रहा है जहाँ प्राचीन जीवन के संकेत मिल सकते हैं।

4. भविष्य के मिशनों पर असर

​यह केवल एक रोवर की बात नहीं है। यह तकनीक भविष्य के Mars Sample Return मिशन और अंततः इंसानों के मंगल पर जाने के सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • स्वायत्त बेस निर्माण: भविष्य में जब इंसान मंगल पर जाएंगे, तो उनसे पहले ऐसे AI रोबोट वहां जाकर बेस या घर तैयार कर सकते हैं।
  • अन्य ग्रह: इसी तरह की AI तकनीक का उपयोग बृहस्पति के चंद्रमा 'यूरोपा' या शनि के चंद्रमा 'टाइटन' पर भी किया जा सकता है।

5. निष्कर्ष: तकनीक और अंतरिक्ष का मिलन

​नासा का पर्सिवियरेंस रोवर अब केवल एक मशीन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता बुद्धिमान लैब बन गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को बढ़ा दिया है। मंगल की उबड़-खाबड़ जमीन पर रोवर के बढ़ते कदम इस बात का सबूत हैं कि आने वाले समय में AI ही ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने में हमारी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।

नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिखा गया है।

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