आसमान में अचानक संकट! सौर विकिरण' और उड़ान सुरक्षा
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आसमान में अचानक संकट: एयरबस ने क्यों बुलाई आधी फ्लीट? 'सौर विकिरण' और उड़ान सुरक्षा पर बड़ा सवाल!
प्रस्तावना (Introduction)
अक्सर हम सोचते हैं कि अंतरिक्ष की घटनाएं सिर्फ उपग्रहों या अंतरिक्ष यात्रियों को प्रभावित करती हैं। लेकिन जनवरी 2026 की एक बड़ी खबर ने इस धारणा को बदल दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनियों में से एक, एयरबस (Airbus), ने अपने सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय मॉडल A320 की लगभग आधी वैश्विक फ्लीट (करीब 6,000 विमान) को तत्काल सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए बुला लिया है।
यह कोई मामूली तकनीकी खराबी नहीं है। इसका सीधा संबंध सौर विकिरण (Solar Radiation) और 'स्पेस वेदर' (Space Weather) से है। क्या ब्रह्मांड से आने वाली अदृश्य लहरें हमारे हवाई सफर को असुरक्षित बना रही हैं? आइए, SpaceAlert.space पर इस गंभीर विषय का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
क्या है पूरा मामला? (The Global Alert)
एयरबस ने हाल ही में एक सुरक्षा बुलेटिन जारी किया है जिसमें चेतावनी दी गई है कि उसके A320 परिवार के विमानों के मुख्य फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर, जिसे ELAC (Elevator Aileron Computer) कहा जाता है, में एक गंभीर 'बग' पाया गया है।
यह बग तब सक्रिय होता है जब विमान उच्च ऊंचाई पर उड़ान भर रहा होता है और वहां मौजूद उच्च-ऊर्जा वाले सौर कण (Solar Particles) कंप्यूटर के चिप्स से टकराते हैं। जनवरी 2026 में सौर गतिविधियों में अचानक आई तेजी के कारण यह खतरा और भी बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए एयरबस ने एहतियात के तौर पर दुनिया भर के हजारों विमानों को अपडेट करने का फैसला लिया है।
सौर विकिरण और 'सिंगल इवेंट अपसेट' (The Science of Solar Radiation)
हजारों फीट की ऊंचाई पर, जहां व्यावसायिक विमान उड़ते हैं, पृथ्वी का वायुमंडल काफी पतला होता है। यहां सूरज से आने वाली 'कॉस्मिक किरणें' और 'सौर फ्लेयर्स' का असर जमीन की तुलना में कहीं अधिक होता है।
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क्या होता है 'सिंगल इवेंट अपसेट' (SEU)?
जब एक उच्च-ऊर्जा वाला सौर कण विमान के कंप्यूटर की सिलिकॉन चिप से टकराता है, तो वह वहां मौजूद 'बिट' (0 या 1) को बदल सकता है। इसे विज्ञान की भाषा में 'सिंगल इवेंट अपसेट' कहा जाता है।
- खतरा: अगर यह बिट विमान के 'पिच' (ऊपर या नीचे झुकने की क्षमता) को नियंत्रित करने वाले डेटा में बदल जाए, तो विमान बिना पायलट के इनपुट के अचानक नीचे की ओर झुक (Pitch-down) सकता है।
- ताज़ा मिसाल: हाल ही में एक अमेरिकी एयरलाइन की उड़ान के दौरान ऐसा ही एक वाकया देखा गया, जहां विमान ने अचानक गोता लगाया। जांच में पता चला कि यह सौर विकिरण के कारण कंप्यूटर में हुई एक छोटी सी गड़बड़ी थी।
ELAC कंप्यूटर की भूमिका (The Role of ELAC)
A320 विमानों में 'फ्लाई-बाय-वायर' (Fly-by-wire) तकनीक का उपयोग होता है। इसका मतलब है कि पायलट जो भी कमांड देता है, वह पहले कंप्यूटर (ELAC) के पास जाती है, और फिर कंप्यूटर पंखों को हिलाता है।
अगर सौर विकिरण के कारण ELAC गलत डेटा प्रोसेस करने लगे, तो यह पायलट की मेहनत को बेकार कर सकता है और विमान को अनियंत्रित कर सकता है। एयरबस का नया सॉफ्टवेयर अपडेट इसी डेटा करप्शन को रोकने के लिए बनाया गया है।
भारतीय विमानन क्षेत्र पर असर (Impact on Indian Aviation)
भारत में IndiGo और Air India जैसी एयरलाइंस बड़े पैमाने पर एयरबस A320 नियो (A320neo) विमानों का उपयोग करती हैं।
- उड़ानों में देरी: चूंकि हजारों विमानों के सॉफ्टवेयर को अपडेट करना है, इसलिए अगले कुछ हफ्तों तक उड़ानों के शेड्यूल में गड़बड़ी हो सकती है।
- सुरक्षा उपाय: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहा है। अच्छी खबर यह है कि यह अपडेट केवल 2 से 3 घंटे का काम है, लेकिन 6,000 विमानों के लिए यह एक बहुत बड़ा लॉजिस्टिक चैलेंज है।
स्पेस वेदर: भविष्य की बड़ी चुनौती (Space Weather as a Threat)
यह घटना साबित करती है कि जैसे-जैसे हमारी तकनीक और अधिक सूक्ष्म (microscopic) होती जा रही है, वह ब्रह्मांडीय किरणों के प्रति उतनी ही संवेदनशील भी होती जा रही है।
- सौर चक्र 25 (Solar Cycle 25): वर्तमान में सूरज अपने 11 साल के चक्र के सबसे सक्रिय दौर में है। इसका मतलब है कि 2026 और 2027 में सौर तूफान और विकिरण की घटनाएं अधिक होंगी।
- नई विमानन नीति की जरूरत: अब केवल मौसम विभाग की रिपोर्ट काफी नहीं है। भविष्य में पायलटों को 'स्पेस वेदर' की रिपोर्ट भी दी जाएगी ताकि वे अधिक विकिरण वाले क्षेत्रों से बच सकें।
SpaceAlert.space का नजरिया
हम अक्सर आसमान में सिर्फ बादलों और बिजली को ही खतरा मानते हैं, लेकिन अब हमें अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। एयरबस का यह कदम सराहनीय है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तकनीकी सुधार को प्राथमिकता दी।
SpaceAlert.space का मानना है कि यह घटना विमानन उद्योग (Aviation Industry) के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। हमें ऐसी कंप्यूटर चिप्स विकसित करनी होंगी जो 'रेडिएशन हार्डन्ड' (Radiation Hardened) हों, यानी जिन पर अंतरिक्ष की किरणों का कोई असर न हो।
निष्कर्ष (Conclusion)
एयरबस द्वारा अपनी आधी फ्लीट को अपडेट के लिए बुलाना सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सौर विकिरण एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन हमारी तकनीक को इससे लड़ने के लिए तैयार होना होगा। यदि आप आने वाले दिनों में यात्रा कर रहे हैं, तो अपनी एयरलाइन से संपर्क जरूर बनाए रखें, क्योंकि आपकी उड़ान इस 'अंतरिक्ष सुरक्षा अपडेट' का हिस्सा हो सकती है।
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Note: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खगोलीय जानकारी के आधार पर लिखा गया है और किसी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का प्रत्यक्ष अनुवाद नहीं है।

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