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Ring of Fire: सूर्य ग्रहण 2026

Ring of Fire annular solar eclipse 2026 visualization
Image Credit: NASA (Illustrative use for educational purposes)

 


लेखक: SpaceAlert टीम
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सूर्य की 'अग्नि वलय' (Ring of Fire): 17 फरवरी 2026 का कुंडलाकार सूर्य ग्रहण और इसके वैज्ञानिक रहस्य

​ब्रह्मांड की गहराइयों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए 17 फरवरी 2026 की तारीख बेहद खास होने वाली है। इस दिन दुनिया एक अद्भुत खगोलीय घटना की गवाह बनेगी—कुंडलाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse)। इसे अक्सर 'रिंग ऑफ फायर' या 'अग्नि वलय' भी कहा जाता है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह किसी महापर्व से कम नहीं है।

​इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि यह ग्रहण क्यों खास है, अंटार्कटिका में इसका क्या प्रभाव होगा और वैज्ञानिक इसे हमारे वायुमंडल (आयनमंडल) और सौर कोरोना के अध्ययन के लिए एक बड़े अवसर के रूप में क्यों देख रहे हैं।

​🌑 क्या होता है कुंडलाकार सूर्य ग्रहण?

​खगोल विज्ञान की भाषा में, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच इस तरह आता है कि वह सूर्य के केंद्र को तो ढंक लेता है, लेकिन उसके किनारों को नहीं छिपा पाता, तो सूर्य के चारों ओर एक चमकदार छल्ला या चूड़ी जैसा दृश्य बनता है। इसे ही 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) कहा जाता है।

​17 फरवरी 2026 को होने वाला यह ग्रहण करीब 96% सूर्य को ढंक लेगा। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा दूर (Apogee के पास) होगा, जिसके कारण उसका आकार सूर्य से छोटा दिखाई देगा।


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​📍 कहां दिखाई देगा यह अद्भुत नजारा?

​यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका के सुदूर इलाकों में अपनी पूर्णता (Annularity) में दिखाई देगा।

  • अंटार्कटिका: यहाँ के रिसर्च स्टेशनों जैसे 'कन्कोर्डिया' (Concordia) और 'मिर्नी' (Mirny) पर वैज्ञानिकों को करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक 'रिंग ऑफ फायर' दिखाई देगा।
  • आंशिक दृश्य: दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों, दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर (चिली और अर्जेंटीना) और हिंद महासागर के द्वीपों पर यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।
  • भारत की स्थिति: दुर्भाग्यवश, भौगोलिक स्थिति और पृथ्वी के झुकाव के कारण यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

​🔬 वैज्ञानिकों के लिए क्यों है यह 'गोल्डन चांस'?

​भले ही यह ग्रहण केवल बर्फ की चादरों पर दिखाई दे, लेकिन वैश्विक विज्ञान जगत की नजरें इस पर टिकी हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

​1. सौर कोरोना (Solar Corona) का रहस्य

​सामान्य दिनों में सूर्य की अत्यधिक चमक के कारण उसके बाहरी वायुमंडल (कोरोना) को देख पाना असंभव होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान, जब चंद्रमा सूर्य के मुख्य हिस्से को ढंकता है, तो वैज्ञानिकों को कोरोना की संरचना, उसके तापमान और वहां से निकलने वाले आवेशित कणों (Solar Winds) के अध्ययन का मौका मिलता है। यह डेटा पृथ्वी के संचार तंत्र को सौर तूफानों से बचाने में मदद करता है।

​2. आयनमंडल (Ionosphere) पर प्रभाव

​पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल की परत, जिसे 'आयनमंडल' कहते हैं, रेडियो तरंगों को परावर्तित (Reflect) करती है। इसी की वजह से हमारा लॉन्ग-डिस्टेंस रेडियो और GPS काम करता है।

  • अंधेरे का असर: जब ग्रहण के दौरान अचानक अंधेरा छाता है, तो आयनमंडल में आयनीकरण (Ionization) की प्रक्रिया रुक जाती है।
  • इलेक्ट्रॉन घनत्व में गिरावट: इससे इलेक्ट्रॉनों का घनत्व तेजी से गिरता है, जिससे आयनमंडल में 'छेद' या 'विघ्न' पैदा होते हैं।
  • भविष्य की तैयारी: वैज्ञानिक यह अध्ययन करना चाहते हैं कि आयनमंडल की यह संरचना मौसम के पूर्वानुमान और उपग्रह संकेतों (Satellite Signals) को कैसे प्रभावित करती है। 17 फरवरी को अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरने वाले संकेतों का विश्लेषण करके मौसम विज्ञान में नई खोजें की जा सकेंगी।

​🛰️ ISRO और NASA की भूमिका

​साल 2026 अंतरिक्ष विज्ञान के लिए "सहयोग का वर्ष" है। NISAR (ISRO-NASA Joint Mission) और TRISHNA जैसे मिशन पहले से ही पृथ्वी की निगरानी कर रहे हैं। इस ग्रहण के दौरान, NASA अपने 'साउंडिंग रॉकेट्स' (Sounding Rockets) के जरिए आयनमंडल में होने वाले बदलावों को मापेगा। वहीं इसरो की नजर इस पर होगी कि यह बदलाव वैश्विक संचार ग्रिड को कैसे प्रभावित करते हैं।

​📅 ग्रहण का समय (UTC)

  • आंशिक ग्रहण की शुरुआत: सुबह 09:56 बजे
  • पूर्ण कुंडलाकार चरण (Annularity): सुबह 11:42 बजे
  • अधिकतम ग्रहण (Maximum): दोपहर 12:12 बजे
  • ग्रहण की समाप्ति: दोपहर 14:27 बजे

​⚠️ सुरक्षा चेतावनी (Safety Tips)

​अगर आप उन खुशकिस्मत लोगों में से हैं जो इसे दक्षिण अफ्रीका या दक्षिण अमेरिका से देखेंगे, तो याद रखें:

  1. सीधे न देखें: सूर्य को नग्न आंखों से देखना आपकी दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है।
  2. सोलर फिल्टर: केवल प्रमाणित (ISO 12312-2) ग्रहण चश्मों का ही उपयोग करें।
  3. कैमरा और दूरबीन: बिना उचित फिल्टर के कैमरे या दूरबीन से सूर्य की ओर न देखें।

​💡 निष्कर्ष

​17 फरवरी 2026 का कुंडलाकार सूर्य ग्रहण केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि प्रकृति की प्रयोगशाला है। अंटार्कटिका की जमा देने वाली ठंड के बीच वैज्ञानिक ब्रह्मांड के उन रहस्यों को सुलझाएंगे जो हमारे संचार और मौसम प्रणालियों को बेहतर बनाएंगे।


Note: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खगोलीय जानकारी के आधार पर लिखा गया है और किसी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का प्रत्यक्ष अनुवाद नहीं है।

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