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जब तारे टकराते हैं: JWST ने खोला "रेड नोवा" और कार्बन-धूल के रहस्य!

JWST infrared image showing carbon-rich dust from stellar merger remnants
Conceptual illustration (AI-generated)


JWST ने खोला रेड नोवा और कार्बन-धूल के रहस्य — तारों की टक्कर से क्या बचता है?

ब्रह्मांड की सबसे रोमांचक खोजों में से एक है ल्यूमिनस रेड नोवा (Luminous Red Nova) — ऐसी खगोलीय घटना जहाँ दो तारे टकराते हैं और विलीन हो जाते हैं, जिससे एक शानदार विस्फोट और उसके बाद अनूठा वैज्ञानिक डेटा मिलता है। हाल ही में James Webb Space Telescope (JWST) ने इस तरह की घटनाओं के अवशेषों को विस्तृत रूप से देखा और इससे जुड़े तथ्यों ने हमारे तारकीय समझ को नया आयाम दिया है। 

🌟 रेड नोवा क्या है?

“नोवा” शब्द लैटिन से आया है जिसका अर्थ होता है “नया”— यह तब होता है जब एक तारा अचानक बहुत चमकदार हो जाता है। लेकिन रेड नोवा एक थोड़ा अलग प्रकार की घटना है। यह तब होती है जब दो तारे एक-दूसरे के साथ टकराते या विलय करते हैं और एक शक्तिशाली विस्फोट की स्थिति बनाते हैं। इस विस्फोट के बाद जो बचता है वह अक्सर एक विशाल, ठंडा स्टार जैसा अवशेष होता है जो धीरे-धीरे ठंडा होता है और बहुत सारा धूल-मलिक पदार्थ छोड़ता है।

🔭 JWST की मदद से क्या नया मिला?

🌌 James Webb Space Telescope (JWST) की सबसे बड़ी खासियत इसकी इन्फ्रारेड देखने की क्षमता है। यह तकनीक घने धूल-बादलों के पीछे छिपे तारकीय अवशेषों को भी देखने में सक्षम है। JWST ने कई रेड नोवा घटनाओं के अवशेषों का अध्ययन किया और पाया कि:

✔️ विस्फोट के बाद जो अवशेष बचते हैं, वे सुपरजाइंट-जैसे तारों जैसी संरचना रखते हैं, पर वे बहुत ठंडे होते हैं।
✔️ इनके आसपास जो धूल है, वह कार्बन-समृद्ध होती है, जिसमें ग्रेफाइट-जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं।
✔️ यह दावा किया गया है कि इन विस्फोटों से निकली कार्बन-धूल अंतरिक्ष में जीवन-निर्माण सामग्री के निर्माण में योगदान दे सकती है।

🌌 तारों की अंतिम कहानी — सुपरजाइंट अवशेष

स्टार सिस्टम के विलय के बाद का अवशेष सामान्य नये तारे से बिल्कुल अलग दिखता है। JWST के इन्फ्रारेड डेटा से पता चला है कि कुछ रेड नोवा के अवशेष ठंडे, बड़े और विस्तृत स्टार की तरह होते हैं — जिनका आकार हमारे सूर्य से सैकड़ों गुना बड़ा है — लेकिन सतह का तापमान अपेक्षाकृत कम होता है।

उदाहरण के लिए, अध्ययन में शामिल दो रेड नोवा घटनाएँ — AT 2011kp और AT 1997bs — में क्रमशः करीब 12 और 27 साल के बाद भी ऐसे अवशेष स्पष्ट रूप से देखे गए। यह दर्शाता है कि रेड नोवा का प्रभाव समय के साथ भी लंबे समय तक बना रहता है। 

🧬 कार्बन-समृद्ध धूल और जीवन की सामग्री

अंतरिक्ष में भारी तत्व, जैसे कार्बन, ऑक्सीजन और लोहा, एक बार तब बनते हैं जब तारों के अंदर परमाणु संलयन होता है और फिर वे विस्फोट या टकराव जैसी घटनाओं के दौरान अंतरstellar medium में फैलते हैं। रेड नोवा विस्फोट के बाद बनने वाली कार्बन-समृद्ध धूल उसी रसायनिक विकास का हिस्सा हो सकती है जो बाद में नए तारों, ग्रहों और संभवतः जीवन-निर्माण सामग्री के निर्माण में योगदान देती है।

🚀 वैज्ञानिक दृष्टिकोण — ब्रह्मांड का चक्रीय विकास

JWST की यह खोज हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि ब्रह्मांड में जीवन-निर्माण तत्व केवल बड़े सुपरनोवा विस्फोटों से ही नहीं आते, बल्कि रेड नोवा और तारों की टक्कर जैसी दुर्लभ घटनाओं से भी महत्वपूर्ण मात्रा में कार्बन-धूल निकल सकती है।
यह नई जानकारी ब्रह्मांड की रसायनिक पुनर्चक्रण प्रक्रिया को समझने में मदद करती है कि कैसे पुराने तारकीय पदार्थ नए तारे और ग्रह बनाने की सामग्री में बदलते हैं।

🧠 निष्कर्ष

JWST की सहायता से रेड नोवा अवशेषों का अवलोकन न केवल तारों के जीवन-चक्र के अंतिम चरण को समझने में मदद करता है, बल्कि यह हमें यह भी दिखाता है कि हमारा ब्रह्मांड कितना गतिशील और विविध है।
यह खोज यह संकेत देती है कि ब्रह्मांड में कार्बन-धूल का निर्माण और फैलाव पहले से कहीं अधिक जटिल और रोमांचक है, और यह जीवन-निर्माण तत्वों के फैलाव के बारे में हमारी समझ को सुदृढ़ करता है।


Note: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खगोलीय जानकारी के आधार पर लिखा गया है और किसी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का प्रत्यक्ष अनुवाद नहीं है।

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