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हेलिक्स नेबुला: 'ईश्वर की आंख' की नई तस्वीरों ने खोले हमारे सूर्य के भविष्य के राज

Image: Conceptual illustration (AI-generated)
Helix Nebula infrared image showing gas and dust structure


 

हेलिक्स नेबुला: ‘ईश्वर की आँख’ की नई इंफ्रारेड तस्वीरें और हमारे सूर्य का भविष्य

ब्रह्मांड की विशालता और रहस्यों में से एक बेहद ख़ास नज़ारा है हेलिक्स नेबुला (Helix Nebula) — जिसे अक्सर लोग “ईश्वर की आँख” के रूप में याद करते हैं। हाल ही में हेलिक्स नेबुला की नई इंफ्रारेड तस्वीरें वैज्ञानिकों के लिए कई बड़े सवाल और जवाब दोनों लेकर आई हैं, और ये हमें यह भी दिखाती हैं कि हमारे अपने सूर्य जैसा तारा जीवन के अंतिम चरण में क्या बदलाव से गुज़रेगा।

हेलिक्स नेबुला क्या है?

हेलिक्स नेबुला एक Planetary Nebula है — यानी ऐसा ग़ैसी गुच्छा जो एक बड़े तारे के जीवन के आख़िरी पड़ाव में बनता है। जब एक सूरज जैसे तारे का ईंधन ख़त्म हो जाता है, तो वह अपनी बाहरी परतों को बाहर फेंक देता है और उसके आस-पास एक चमकदार बादल बन जाता है। इससे हमारे जैसे तारे के भविष्य का एक झलक मिलता है।


इस नेबुला में मौजूद गैस और धूल सूर्य जैसे एक मरे हुए तारे के अवशेष हैं। इसका नाम इसलिए “Helix” (हेलिक्स) क्योंकि इसका आकार एक विस्तृत घुमावदार ढांचे जैसा दिखता है जो सूक्ष्म रूप से आंख की तरह लगता है

नई इंफ्रारेड तस्वीरों में क्या खास दिखा?

नया डेटा खासकर नजदीकी James Webb Space Telescope (JWST) और अन्य अंतरिक्ष दूरबीनों से मिला है। ये इंफ्रारेड तस्वीरें उन हिस्सों को भी स्पष्ट रूप से दिखाती हैं जिन्हें सामान्य प्रकाश में देख पाना मुश्किल होता है। 

Comet-जैसी गैस की गांठें

इन तस्वीरों में कई छोटी-छोटी गैसीय “cometary knots” दिखाई देती हैं — ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ गैस और धूल बड़े पैमाने पर जमा हैं और तेज़ दिशा में फैल रहे हैं। ये संरचनाएँ बताती हैं कि नेबुला में गैसों के बीच किस तरह के उभार और गतिविधियाँ होती हैं। 



ठंडी और गरम गैस का अंतर

इंफ्रारेड में हम ठंडी गैस के बादलों और उनके बीच गर्म गैस के क्षेत्र को अलग-अलग पहचान सकते हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि नेबुला का ऊष्मा फैलाव अलग-अलग स्तरों पर होता है — ऊँची तापमान वाली गैस और ठंडी धूल के बीच स्पष्ट अंतर दिखता है। 

व्हाइट ड्वार्फ का प्रभाव

हेलिक्स नेबुला के केंद्र में एक छोटा, अत्यधिक गर्म तारा है जिसे व्हाइट ड्वार्फ कहते हैं। यह वह तारा है जिसने अपनी बाहरी परतें छोड़ दी हैं, और अब यह बाकी गैसों को गर्म करके चमक पैदा करता है। इंफ्रारेड तस्वीरें इसी ऊर्जा के प्रभाव को दिखाती हैं। 

हमारे सूर्य का भविष्य — क्या यह भी ऐसा ही होगा?

हेलिक्स नेबुला हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारा अपना सूर्य भी अपने जीवन के अंतिम चरण में क्या रूप ले सकता है। विज्ञान यह अनुमान लगाता है कि लगभग 5 अरब साल बाद, हमारा सूर्य भी जीवन के आख़िरी चरण में इसी तरह अपने बाहरी भागों को बाहरी अंतरिक्ष में छोड़ेगा और अंत में एक व्हाइट ड्वार्फ बन जाएगा। 

Image: Conceptual illustration (AI-generated)


इस तरह के परिवर्तन विज्ञान और ब्रह्मांड के चक्रीय चक्र को दिखाते हैं — जन्म, मृत्यु और पुनरुत्थान जैसा पैटर्न। Helix Nebula इस चक्र का एक शानदार उदाहरण है, जो यह दिखाता है कि कैसे तारे, ग्रह, धूल और गैस मिलकर नए तारे और ग्रहों के निर्माण की सामग्री बनते हैं।

वैज्ञानिक और कलात्मक दृष्टिकोण

यह तस्वीरें सिर्फ सुंदर ही नहीं हैं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। गैसों की संरचनाएं और धूल के गुच्छे हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि अंतरिक्ष में पदार्थ कैसे गतिशीलता से बदलता है और किस तरह छोटे-छोटे कण बड़े पैमाने पर संरचनाएँ बनाते हैं।
ये नई इमेजरी शोधकर्ताओं के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि वे इससे यह समझ सकते हैं कि नेबुला के भीतर गैसों का विस्तार किस तरह से होता है और किस प्रकार से ग़ैसी संरचनाएँ समय के साथ बदलती हैं। 

निष्कर्ष

हेलिक्स नेबुला हमारी ब्रह्मांडीय यात्रा के एक रोचक और महत्वपूर्ण अध्याय को दर्शाता है। यह न केवल एक सुंदर खगोलीय संरचना है, बल्कि यह उस बड़े सवाल को भी सामने रखता है कि कैसे एक तारा अपनी अंतिम अवस्था में बदलता है और ब्रह्मांड में वापस अपनी उपस्थिति के निशान छोड़ता है।
अगर आप ब्रह्मांड के रहस्यों में और गहराई से जाना चाहते हैं, तो हेलिक्स नेबुला की ये नई इंफ्रारेड तस्वीरें वह खिड़की हैं जो आपको हमारे सूर्य जैसे तारे के जीवन के आख़िरी चरण की कहानी बताते हैं — पढ़ें, समझें और सोचें कि हमारी आकाशीय दुनिया कितनी अद्भुत है। 

Note: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खगोलीय जानकारी के आधार पर लिखा गया है और किसी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का प्रत्यक्ष अनुवाद नहीं है।

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